श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.76.7 
अर्जुन उवाच
न पुरा भीमसेन त्वमीदृशीर्वदिता गिर:।
परैस्ते नाशितं नूनं नृशंसैर्धर्मगौरवम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - भैया भीमसेन! आपने पहले कभी ऐसी बात नहीं कही। निश्चय ही क्रूर शत्रुओं ने आपके धर्म-गौरव को नष्ट कर दिया है।
 
Arjun said - Brother Bhimasena! You have never said such things before. Certainly the cruel enemies have destroyed your pride in Dharma.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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