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श्लोक 2.76.69  |
स वै विवदनाद् भीत: सुधन्वानं विलोकयन्।
तं सुधन्वाब्रवीत् क्रुद्धो ब्रह्मदण्ड इव ज्वलन्॥ ६९॥ |
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| अनुवाद |
| प्रह्लाद उस तर्क से भयभीत होकर सुधन्वा की ओर देखने लगे। तब सुधन्वा प्रज्वलित ब्रह्मा की छड़ी के समान क्रोधित होकर बोले-॥69॥ |
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| Prahlada became afraid of the argument and started looking at Sudhanva. Then Sudhanva became angry like the blazing Brahma's rod and said -॥ 69॥ |
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