श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  2.76.68 
तयो: प्रश्नविवादोऽभूत् प्रह्लादं तावपृच्छताम्।
ज्यायान् क आवयोरेक: प्रश्नं प्रब्रूहि मा मृषा॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
जब श्रेष्ठता के प्रश्न पर उनका विवाद बहुत बढ़ गया, तो उन्होंने दैत्यराज प्रह्लाद के पास जाकर पूछा, "हम दोनों में श्रेष्ठ कौन है? कृपया इस प्रश्न का सही उत्तर दें और झूठ न बोलें।"
 
When their dispute over the question of superiority became too intense, they went and asked the demon king Prahlada, 'Who is the best among us two? Please answer this question correctly and do not lie.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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