श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  2.76.67 
अहं ज्यायानहं ज्यायानिति कन्येप्सया तदा।
तयोर्देवनमत्रासीत् प्राणयोरिति न: श्रुतम्॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों उस लड़की को पाने की चाहत में कहने लगे, ‘मैं ही सबसे अच्छा हूँ, मैं ही सबसे अच्छा हूँ।’ मैंने सुना है कि अपनी बात सच साबित करने के लिए उन दोनों ने अपनी जान भी दांव पर लगा दी।
 
Both of them, in their desire to get that girl, started saying, 'I am the best, I am the best.' I have heard that both of them put their lives at stake to prove their words true.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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