श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  2.76.66 
प्रह्लादो नाम दैत्येन्द्रस्तस्य पुत्रो विरोचन:।
कन्याहेतोराङ्गिरसं सुधन्वानमुपाद्रवत्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
दैत्यों के राजा प्रह्लाद का विरोचन नाम का एक पुत्र था। केशिनी नामक पुत्री के विवाह के लिए उनका अंगिरा के पुत्र सुधन्वा से विवाद हो गया।
 
Prahlada, the king of demons, had a son named Virochana. He had a dispute with Sudhanva, the son of Angira, for the marriage of a daughter named Keshini.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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