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mahabharat 2.76.65: इस सम्बन्ध में विद्वान प्रह्लाद और अंगिरा के पुत्र सुधन्वा ऋषि के बीच हुए संवाद के रूप में इस प्राचीन इतिहास का उदाहरण दिया जाता है।   |   mahabharat अध्याय 2.76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  2.76.65 
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
प्रह्लादस्य च संवादं मुनेराङ्गिरसस्य च॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
इस सम्बन्ध में विद्वान प्रह्लाद और अंगिरा के पुत्र सुधन्वा ऋषि के बीच हुए संवाद के रूप में इस प्राचीन इतिहास का उदाहरण दिया जाता है।
 
In this regard the example of this ancient history in the form of a dialogue between the learned Prahlada and the sage Sudhanva, the son of Angira, is given. 65.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)