श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  2.76.63 
यो हि प्रश्नं न विब्रूयाद् धर्मदर्शी सभां गत:।
अनृते या फलावाप्तिस्तस्या: सोऽर्धं समश्नुते॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
जो धर्म को जाननेवाला मनुष्य सभा में जाकर वहाँ पूछे गए प्रश्नों का उत्तर नहीं देता, वह झूठ बोलने का आधा फल भोगता है ॥ 63॥
 
A man knowledgeable about Dharma who goes to a gathering and does not answer the questions posed there, bears half the consequences of telling a lie. ॥ 63॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas