श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  2.76.62 
विकर्णेन यथाप्रज्ञमुक्त: प्रश्नो नराधिपा:।
भवन्तोऽपि हि तं प्रश्नं विब्रुवन्तु यथामति॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
हे राजाओं! विकर्ण ने अपनी बुद्धि के अनुसार इस प्रश्न का उत्तर दे दिया है, अब आप भी अपनी बुद्धि के अनुसार इस प्रश्न का निर्णय करें ॥ 62॥
 
O kings! Vikarna has answered this question according to his wisdom, now you too should decide the question according to your wisdom. ॥ 62॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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