श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  2.76.61 
धर्मप्रश्नमतो ब्रूयादार्य: सत्येन मानव:।
विब्रूयुस्तत्र तं प्रश्नं कामक्रोधबलातिगा:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
अतः उचित है कि सज्जन पुरुष सत्यनिष्ठा से धर्म-आधारित प्रश्न प्रस्तुत करें तथा सभा के सदस्य काम-क्रोध के आवेग से ऊपर उठकर उस प्रश्न पर उचित विचार-विमर्श करें। 61.
 
Therefore, it is appropriate for a noble man to present a Dharma-based question with honesty and the members of the assembly should rise above the impulse of lust and anger and discuss the question correctly. 61.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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