Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.76.60: संकट में पड़ा हुआ, आग की तरह चिन्ताओं से जलता हुआ मनुष्य सभा की शरण लेता है। उस समय सभा के सदस्य धर्म और सत्य का आश्रय लेकर उसे अपने वचनों से शांत करते हैं। | mahabharat अध्याय 2.76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संकट में पड़ा हुआ, आग की तरह चिन्ताओं से जलता हुआ मनुष्य सभा की शरण लेता है। उस समय सभा के सदस्य धर्म और सत्य का आश्रय लेकर उसे अपने वचनों से शांत करते हैं।
A person in trouble, burning with worries like fire, takes refuge in the assembly. At that time, the members of the assembly, taking refuge in Dharma and Truth, pacify him with their words.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥