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mahabharat 2.76.6: राजन! द्रौपदी की इस दयनीय स्थिति के लिए मैं तुम पर अपना क्रोध उतार रहा हूँ। मैं तुम्हारी दोनों भुजाएँ जला दूँगा। सहदेव! अग्नि लाओ।   |   mahabharat अध्याय 2.76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.76.6 
अस्या: कृते मन्युरयं त्वयि राजन् निपात्यते।
बाहू ते सम्प्रधक्ष्यामि सहदेवाग्निमानय॥ ६॥
 
 
अनुवाद
राजन! द्रौपदी की इस दयनीय स्थिति के लिए मैं तुम पर अपना क्रोध उतार रहा हूँ। मैं तुम्हारी दोनों भुजाएँ जला दूँगा। सहदेव! अग्नि लाओ।
 
King! I am unleashing my anger on you for this miserable condition of Draupadi. I will burn both your arms. Sahadeva! Bring fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)