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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  2.76.59 
विदुर उवाच
द्रौपदी प्रश्नमुक्त्वैवं रोरवीति ह्यनाथवत्।
न च विब्रूत तं प्रश्नं सभ्या धर्मोऽत्र पीडॺते॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
विदुर जी बोले - हे इस सभा में उपस्थित राजाओं! द्रुपद की पुत्री कृष्णा यहाँ अपना प्रश्न प्रस्तुत करके अनाथ की भाँति रो रही है; किन्तु आप लोग इस पर चर्चा नहीं कर रहे हैं, इसलिए यहाँ धर्म की हानि हो रही है।
 
Vidur ji said - O kings present in this assembly! Drupada's daughter Krishna is crying like an orphan after presenting her question here; but you people are not discussing it, hence religion is being harmed here.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)