श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  2.76.58 
ततो बाहू समुच्छ्रित्य निवार्य च सभासद:।
विदुर: सर्वधर्मज्ञ इदं वचनमब्रवीत्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
तब सम्पूर्ण धर्मों के ज्ञाता विदुर जी ने अपनी भुजाएँ उठाकर सभा के सदस्यों को चुप करा दिया और इस प्रकार कहा।
 
Then Vidur Ji, the knower of all the religions, raised his arms and silenced the members of the assembly and said thus.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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