श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  2.76.55 
यदा तु वाससां राशि: सभामध्ये समाचित:।
ततो दु:शासन: श्रान्तो व्रीडित: समुपाविशत्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
जब सभा में वस्त्रों का ढेर लग गया, तब थका हुआ और लज्जित होकर दु:शासन चुपचाप बैठ गया। 55.
 
When a pile of clothes was piled up in the assembly, Dushasan, tired and ashamed, sat down quietly. 55.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas