Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.76.45-46: द्रुपद नन्दिनी की करुण पुकार सुनकर दयालु श्रीकृष्ण अत्यन्त प्रसन्न हुए और दया से द्रवित होकर अपना शय्या और आसन छोड़कर पैदल ही चल पड़े। यज्ञसेनकुमारी कृष्ण उनकी रक्षा के लिए जोर-जोर से भगवान श्रीकृष्ण, विष्णु, हरि और नर आदि का नाम पुकार रही थीं। उसी समय धर्मस्वरूप महात्मा श्रीकृष्ण ने अव्यक्त रूप धारण करके उनके वस्त्रों में प्रवेश किया और द्रौपदी को नाना प्रकार के सुन्दर वस्त्रों से आच्छादित कर दिया। 45-46॥ | mahabharat अध्याय 2.76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
याज्ञसेन्या वच: श्रुत्वा कृष्णो गह्वरितोऽभवत्।
त्यक्त्वा शय्याऽऽसनं पद्भ्यां कृपालु: कृपयाभ्यगात्॥ ४५॥
कृष्णं च विष्णुं च हरिं नरं च
त्राणाय विक्रोशति याज्ञसेनी।
ततस्तु धर्मोऽन्तरितो महात्मा
समावृणोद् वै विविधै: सुवस्त्रै:॥ ४६॥
अनुवाद
द्रुपद नन्दिनी की करुण पुकार सुनकर दयालु श्रीकृष्ण अत्यन्त प्रसन्न हुए और दया से द्रवित होकर अपना शय्या और आसन छोड़कर पैदल ही चल पड़े। यज्ञसेनकुमारी कृष्ण उनकी रक्षा के लिए जोर-जोर से भगवान श्रीकृष्ण, विष्णु, हरि और नर आदि का नाम पुकार रही थीं। उसी समय धर्मस्वरूप महात्मा श्रीकृष्ण ने अव्यक्त रूप धारण करके उनके वस्त्रों में प्रवेश किया और द्रौपदी को नाना प्रकार के सुन्दर वस्त्रों से आच्छादित कर दिया। 45-46॥
Hearing the pitiful cry of Drupada Nandini, the merciful Shri Krishna became overjoyed and moved on foot, leaving his bed and seat and moved with pity. Yagyasenkumari Krishna was loudly calling the names of Lord Krishna, Vishnu, Hari and Nar etc. for her protection. At the same time, Mahatma Shri Krishna, in the form of Dharma, entered her clothes in an avyakt form and covered Draupadi with various beautiful clothes. 45-46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥