श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.76.43 
कृष्ण कृष्ण महायोगिन् विश्वात्मन् विश्वभावन।
प्रपन्नां पाहि गोविन्द कुरुमध्येऽवसीदतीम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
हे सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीकृष्ण! महायोगिन! विश्वात्मान! विश्वभाव! गोविन्द! कौरवों के बीच शरणागत और दुःख भोग रही मुझ अबला की आप रक्षा करें॥ 43॥
 
'Shri Krishna in the form of Sachchidananda! Mahayogin! Vishwatman! Universal feeling! Govind! Please protect me, Abala, who has taken refuge among the Kauravas and is suffering.' 43॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas