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श्लोक 2.76.40  |
ततो दु:शासनो राजन् द्रौपद्या वसनं बलात्।
सभामध्ये समाक्षिप्य व्यपाक्रष्टुं प्रचक्रमे॥ ४०॥ |
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| अनुवाद |
| महाराज! तब दु:शासन ने भरी सभा में द्रौपदी के वस्त्र बलपूर्वक पकड़ लिए और उन्हें खींचने लगा। |
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| King! Then Dushasan forcibly grabbed Draupadi's clothes and began pulling them in front of the crowded assembly. 40. |
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