श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  2.76.38 
दु:शासन सुबालोऽयं विकर्ण: प्राज्ञवादिक:।
पाण्डवानां च वासांसि द्रौपद्याश्चाप्युपाहर॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
दु:शासन! यह विकर्ण बड़ा मूर्ख है, फिर भी विद्वानों की तरह बोलता है। तुम्हें पांडवों और द्रौपदी के वस्त्र भी उतार देने चाहिए। 38.
 
Dushasan! This Vikarna is very foolish, yet he talks like a scholar. You should remove the clothes of the Pandavas and Draupadi as well. 38.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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