श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.76.37 
यच्चैषां द्रविणं किंचिद् या चैषा ये च पाण्डवा:।
सौबलेनेह तत् सर्वं धर्मेण विजितं वसु॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों के पास जो कुछ भी धन है, द्रौपदी और ये पाण्डव, सुबलपुत्र शकुनि उन सबको जुए के धन के रूप में यहाँ धर्मपूर्वक निवास करते हैं ॥37॥
 
Whatever wealth the Pandavas have, Draupadi and these Pandavas, Shakuni, the son of Subala, lives all of them righteously here in the form of money from gambling. ॥ 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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