श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.76.34 
मन्यसे वा सभामेतामानीतामेकवाससम्।
अधर्मेणेति तत्रापि शृणु मे वाक्यमुत्तमम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
अथवा यदि तुम्हारा ऐसा विचार है कि द्रौपदी को एक वस्त्र पहनाकर अन्यायपूर्वक इस सभा में लाया गया है, तो इसके उत्तर में भी मेरी उत्तम सलाह सुनो ॥ 34॥
 
Or, if you are of the opinion that Draupadi, wearing only one garment, has been brought to this assembly unjustly, then listen to my excellent advice in answer to this also. ॥ 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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