श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.76.33 
कीर्तिता द्रौपदी वाचा अनुज्ञाता च पाण्डवै:।
भवत्यविजिता केन हेतुनैषा मता तव॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने अपने वचनों से द्रौपदी को दांव पर लगा दिया और शेष पाण्डवों ने मौन रहकर उसका अनुमोदन किया, फिर तुम उसे विजेता क्यों नहीं मानते?॥ 33॥
 
Yudhishthira put Draupadi at stake by speaking through his words and the rest of the Pandavas approved it by remaining silent. Then why do you not consider her as the winner?॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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