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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.76.30 
न च धर्मं यथावत् त्वं वेत्सि दुर्योधनावर।
यद् ब्रवीषि जितां कृष्णां न जितेति सुमन्दधी:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन के छोटे भाई! तुम्हें धर्म का सच्चा ज्ञान नहीं है। तुम कह रहे हो कि द्रौपदी, जिसे जीता गया था, जीती नहीं गई, इससे पता चलता है कि तुम मूर्ख हो।
 
Duryodhan's younger brother! You do not have the true knowledge of Dharma. You are saying that Draupadi, who was won, was not won, this shows that you are a fool.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)