श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.76.25 
एतच्छ्रुत्वा महान् नाद: सभ्यानामुदतिष्ठत।
विकर्णं शंसमानानां सौबलं चापि निन्दताम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर सभा के सभी सदस्य विकर्ण की प्रशंसा और सुबलपुत्र शकुनि की निन्दा करने लगे। उस समय वहाँ महान् कोलाहल मच गया॥ 25॥
 
On hearing this all the members of the assembly started praising Vikarna and criticising Subala's son Shakuni. At that time there was a great uproar there.॥ 25॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas