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mahabharat 2.76.23: सती-साध्वी द्रौपदी केवल युधिष्ठिर की ही नहीं, अपितु समस्त पाण्डवों की समान रूप से पत्नी है। इसके अतिरिक्त पाण्डुकुमार युधिष्ठिर पहले ही अपने आपको हार चुके हैं, तत्पश्चात् उन्होंने द्रौपदी को भी दांव पर लगा दिया है॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 2.76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.76.23 
साधारणी च सर्वेषां पाण्डवानामनिन्दिता।
जितेन पूर्वं चानेन पाण्डवेन कृत: पण:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
सती-साध्वी द्रौपदी केवल युधिष्ठिर की ही नहीं, अपितु समस्त पाण्डवों की समान रूप से पत्नी है। इसके अतिरिक्त पाण्डुकुमार युधिष्ठिर पहले ही अपने आपको हार चुके हैं, तत्पश्चात् उन्होंने द्रौपदी को भी दांव पर लगा दिया है॥ 23॥
 
‘Sati-Sadhvi Draupadi is the wife of all Pandavas equally, not just Yudhishthira. Besides, Pandukumar Yudhishthira had already lost himself, after that he has put Draupadi at stake.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)