श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.76.22 
तदयं पाण्डुपुत्रेण व्यसने वर्तता भृशम्।
समाहूतेन कितवैरास्थितो द्रौपदीपण:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'ये पाण्डु नन्दन युधिष्ठिर पापकर्म में अत्यन्त लिप्त हैं। धूर्त जुआरियों के कहने से प्रेरित होकर इन्होंने द्रौपदी को दांव पर लगा दिया है। 22॥
 
'This Pandu Nandan Yudhishthir is very much engrossed in the vice of evil. Inspired by cunning gamblers, he has put Draupadi at stake. 22॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas