श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.76.20 
चत्वार्याहुर्नरश्रेष्ठा व्यसनानि महीक्षिताम्।
मृगयां पानमक्षांश्च ग्राम्ये चैवातिरक्तताम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
‘नरश्रेष्ठ भूपालो! राजाओं के चार दुर्गुण कहे गए हैं - शिकार करना, मद्यपान करना, जुआ खेलना और विषय-भोगों में अत्यधिक आसक्ति।’ 20॥
 
‘Narshrestha Bhupalo! Four vices of kings have been described - hunting, drinking, gambling and extreme attachment to sensual pleasures. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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