श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.76.19 
विब्रूत पृथिवीपाला वाक्यं मा वा कथंचन।
मन्ये न्याय्यं यदत्राहं तद्धि वक्ष्यामि कौरवा:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'कौरवों और अन्य भूस्वामियों! द्रौपदी के प्रश्न पर आप सब लोग कोई राय व्यक्त करें या न करें, मैं इस विषय में जो उचित समझूँगा, वही कहूँगा।
 
'Kauravas and other land-owners! Whether you all express any opinion on the question of Draupadi or not, I will say what I think is fair in this matter.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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