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mahabharat 2.76.16: हे राजन! कल्याणी द्रौपदी ने जो प्रश्न बार-बार पूछा है, उस पर विचार करके उसका उत्तर दो, जिससे यह ज्ञात हो जाए कि इस विषय में किसका क्या मत है।   |   mahabharat अध्याय 2.76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.76.16 
यदिदं द्रौपदीवाक्यमुक्तवत्यसकृच्छुभा।
विमृश्य कस्य क: पक्ष: पार्थिवा वदतोत्तरम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! कल्याणी द्रौपदी ने जो प्रश्न बार-बार पूछा है, उस पर विचार करके उसका उत्तर दो, जिससे यह ज्ञात हो जाए कि इस विषय में किसका क्या मत है।
 
O kings! Please think over the question which Kalyani Draupadi has repeatedly asked and answer it so that it becomes known who takes what view on this matter.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)