श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.76.11 
वैशम्पायन उवाच
तथा तान् दु:खितान् दृष्ट्वा पाण्डवान् धृतराष्ट्रज:।
कृष्यमाणां च पाञ्चालीं विकर्ण इदमब्रवीत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं: जनमेजय! पाण्डवों को दुःखी तथा पांचाल राजकुमारी द्रौपदी को घसीटे जाते देख धृतराष्ट्रपुत्र विकर्ण ने यह कहाः॥ 11।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! Seeing the Pandavas sad and the Panchala princess Draupadi being dragged away, Dhritarashtra's son Vikarna said this:॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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