श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.75.3 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त: प्रातिकामी स सूत:
प्रायाच्छीघ्रं राजवचो निशम्य।
प्रविश्य च श्वेव हि सिंहगोष्ठं
समासदन्महिषीं पाण्डवानाम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - 'हे जनमेजय! दुर्योधन की यह बात सुनकर सारथी प्रतिकामी राजा की आज्ञा मानकर शीघ्रता से चला गया। जैसे कुत्ता सिंह की मांद में घुस जाता है, उसी प्रकार वह राजमहल में घुसकर पाण्डव रानी के पास गया।'
 
Vaishmpayana says - 'O Janamejaya! On hearing Duryodhan say this, the charioteer Pratikami obeyed the king's command and went quickly. Just like a dog enters a lion's den, in the same way he entered the royal palace and went to the Pandava queen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)