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mahabharat 2.75.22: इधर महात्मा पाण्डव सत्य के बन्धन में बँधकर अत्यन्त दरिद्र और दुःखी हो गये, उन्हें कुछ भी सुध नहीं रही ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 2.75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.75.22 
पाण्डवाश्च महात्मानो दीना दु:खसमन्विता:।
सत्येनातिपरीताङ्गा नोदीक्षन्ते स्म किंचन॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इधर महात्मा पाण्डव सत्य के बन्धन में बँधकर अत्यन्त दरिद्र और दुःखी हो गये, उन्हें कुछ भी सुध नहीं रही ॥22॥
 
Here, Mahatma Pandava became extremely poor and saddened by being bound by the bondage of truth. He could not think of anything. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)