श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 67: जूएके अनौचित्यके सम्बन्धमें युधिष्ठिर और शकुनिका संवाद  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.67.4 
शकुनिरुवाच
उपस्तीर्णा सभा राजन् सर्वे त्वयि कृतक्षणा:।
अक्षानुप्त्वा देवनस्य समयोऽस्तु युधिष्ठिर॥ ४॥
 
 
अनुवाद
शकुनि ने कहा - महाराज युधिष्ठिर! सभा में पासा फेंकने का कपड़ा बिछा दिया गया है, सभी आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब आपको पासा फेंककर जुआ खेलने का अवसर मिलना चाहिए।
 
Shakuni said - King Yudhishthira! The dice throwing cloth has been laid out in the assembly, everyone is waiting for you. Now you should get a chance to play gambling by throwing the dice.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)