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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 67: जूएके अनौचित्यके सम्बन्धमें युधिष्ठिर और शकुनिका संवाद  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.67.17 
एवं त्वं मामिहाभ्येत्य निकृतिं यदि मन्यसे।
देवनाद् विनिवर्तस्व यदि ते विद्यते भयम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार, यदि आप मेरे पास आते हैं और मानते हैं कि आपके साथ धोखा होगा और यदि आपको डर लगता है, तो कृपया इस जुए के खेल से संन्यास ले लें।
 
Similarly, if you come to me and believe that you will be cheated and if you feel afraid, then please retire from this game of gambling.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)