श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 67: जूएके अनौचित्यके सम्बन्धमें युधिष्ठिर और शकुनिका संवाद  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.67.14 
शकुनिरुवाच
श्रोत्रिय: श्रोत्रियानेति निकृत्यैव युधिष्ठिर।
विद्वानविदुषोऽभ्येति नाहुस्तां निकृतिं जना:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
शकुनि बोले- युधिष्ठिर! जब कोई श्रोत्रिय विद्वान किसी दूसरे श्रोत्रिय विद्वान को जीतने के लिए उसके पास जाता है, तब वह छल का प्रयोग करता है। विद्वान व्यक्ति अज्ञानी को छल से परास्त कर देता है; परन्तु सामान्य लोग इसे छल नहीं कहते॥14॥
 
Shakuni said— Yudhishthira! When a Shrotri scholar goes to another Shrotri scholar to win them over, he uses deceit. A scholar defeats an ignorant person through deceit; but the common people do not call this deceit.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)