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mahabharat 2.66.38: इस प्रकार रात्रि व्यतीत करने के पश्चात् वह प्रातःकाल उठा और संध्यावंदन आदि नित्य कर्म करके उस सुन्दर सभा में गया। वहाँ जुआरियों ने उसका स्वागत किया।   |   mahabharat अध्याय 2.66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  2.66.38 
सुखोषितास्ते रजनीं प्रात: सर्वे कृताह्निका:।
सभां रम्यां प्रविविशु: कितवैरभिनन्दिता:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार रात्रि व्यतीत करने के पश्चात् वह प्रातःकाल उठा और संध्यावंदन आदि नित्य कर्म करके उस सुन्दर सभा में गया। वहाँ जुआरियों ने उसका स्वागत किया।
 
Having spent the night in this manner, he got up in the morning and after performing his daily rituals like evening prayers, he went to that beautiful gathering. There the gamblers welcomed him.
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि द्यूतपर्वणि युधिष्ठिरसभागमनेऽष्टपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत द्यूतपर्वमें युधिष्ठिरसभागमनविषयक अट्ठावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५८॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २३ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ६१ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)