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mahabharat 2.66.37: उनकी वह पुण्य रात्रि सुखपूर्वक समाप्त हुई। प्रातःकाल पूर्ण विश्राम करके उन्होंने कैदियों से स्तुति सुनते हुए निद्रा त्याग दी। 37॥   |   mahabharat अध्याय 2.66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.66.37 
जगाम तेषां सा रात्रि: पुण्या रतिविहारिणाम्।
स्तूयमानाश्च विश्रान्ता: काले निद्रामथात्यजन्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
उनकी वह पुण्य रात्रि सुखपूर्वक समाप्त हुई। प्रातःकाल पूर्ण विश्राम करके उन्होंने कैदियों से स्तुति सुनते हुए निद्रा त्याग दी। 37॥
 
That virtuous night of theirs ended happily. In the morning, after taking complete rest, he gave up sleep while listening to the praise from the prisoners. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)