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mahabharat 2.66.3-4: धर्मात्मा विदुर कुबेर के महल के समान सुसज्जित राजमहल में जाकर धर्मपुत्र युधिष्ठिर से मिले। सत्यवादी महात्मा अजमीधानन्दन अजातशत्रु राजा युधिष्ठिर ने विदुरजी का यथोचित आदर-सत्कार किया और उनसे पुत्रसहित धृतराष्ट्र का कुशलक्षेम पूछा।   |   mahabharat अध्याय 2.66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  2.66.3-4 
स राजगृहमासाद्य कुबेरभवनोपमम्।
अभ्यागच्छत धर्मात्मा धर्मपुत्रं युधिष्ठिरम्॥ ३॥
तं वै राजा सत्यधृतिर्महात्मा
अजातशत्रुर्विदुरं यथावत्।
पूजापर्वं प्रतिगृह्याजमीढ-
स्ततोऽपृच्छद् धृतराष्ट्रं सपुत्रम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा विदुर कुबेर के महल के समान सुसज्जित राजमहल में जाकर धर्मपुत्र युधिष्ठिर से मिले। सत्यवादी महात्मा अजमीधानन्दन अजातशत्रु राजा युधिष्ठिर ने विदुरजी का यथोचित आदर-सत्कार किया और उनसे पुत्रसहित धृतराष्ट्र का कुशलक्षेम पूछा।
 
The virtuous Vidur went to the royal palace decorated like Kubera's palace and met Dharma's son Yudhishthira. Truthful Mahatma Ajamidhanandan Ajatashatru King Yudhishthir honored Vidurji with due respect and asked him about the well-being of Dhritarashtra along with his son. 3-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)