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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.66.17 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त्वा विदुरं धर्मराज:
प्रायात्रिकं सर्वमाज्ञाप्य तूर्णम्।
प्रायाच्छ्वोभूते सगण: सानुयात्र:
सह स्त्रीभिर्द्रौपदीमादि कृत्वा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! विदुर से ऐसा कहकर धर्मराज युधिष्ठिर ने उन्हें तुरन्त यात्रा की सारी तैयारी करने का आदेश दिया। फिर प्रातःकाल वे अपने भाइयों, सम्बन्धियों, सेवकों और द्रौपदी आदि स्त्रियों के साथ हस्तिनापुर के लिए चल पड़े।
 
Vaishampayana says - Janamejaya! Having said this to Vidura, Dharmaraja Yudhishthira immediately ordered him to make all the preparations for the journey. Then in the morning, he set out for Hastinapur along with his brothers, relatives, servants and women like Draupadi. 17.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)