| श्री महाभारत » पर्व 2: सभा पर्व » अध्याय 66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना » श्लोक 14 |
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| | | | श्लोक 2.66.14  | युधिष्ठिर उवाच
महाभया: कितवा: संनिविष्टा
मायोपधा देवितारोऽत्र सन्ति।
धात्रा तु दिष्टस्य वशे किलेदं
सर्वं जगत् तिष्ठति न स्वतन्त्रम्॥ १४॥ | | | | | | अनुवाद | | युधिष्ठिर बोले, "तब तो वहाँ बड़े भयंकर, धूर्त और कपटी जुआरी इकट्ठे हुए हैं। विधाता द्वारा रचित यह सम्पूर्ण जगत् ईश्वर पर आश्रित है, स्वतन्त्र नहीं है।" 14. | | | | Yudhishthira said, "Then there are very dangerous, cunning and deceitful gamblers gathered there. This entire world created by the Creator is dependent on God; it is not independent." 14. | | ✨ ai-generated | | |
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