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श्लोक 2.64.6  |
धृतराष्ट्र उवाच
स्थितोऽस्मि शासने भ्रातुर्विदुरस्य महात्मन:।
तेन संगम्य वेत्स्यामि कार्यस्यास्य विनिश्चयम्॥ ६॥ |
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| अनुवाद |
| धृतराष्ट्र बोले—बेटा! मैं अपने भाई महात्मा विदुर की सलाह मानूँगा। उनसे मिलकर मैं जान सकूँगा कि इस कार्य के विषय में क्या निर्णय लेना चाहिए।॥6॥ |
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| Dhritarashtra said—Son! I will follow the advice of my brother Mahatma Vidur. After meeting him I will be able to know what should be decided regarding this task.॥ 6॥ |
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