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mahabharat 2.61.4-5: भरत! राजाओं ने स्वयं ही युधिष्ठिर के राज्याभिषेक के लिए प्रयत्न किया और शांत मन से, बड़े आदर के साथ, छोटे-बड़े पात्र लाए। बाह्लीकन के राजा ने एक स्वर्ण-मंडित रथ मंगवाया। सुदक्षिण ने उस रथ में कम्बोज देश के श्वेत घोड़े जोते। 4-5।   |   mahabharat अध्याय 2.61: दुर्योधनद्वारा युधिष्ठिरके अभिषेकका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 61: दुर्योधनद्वारा युधिष्ठिरके अभिषेकका वर्णन  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  2.61.4-5 
आजह्रुस्तत्र सत्कृत्य स्वयमुद्यम्य भारत।
अभिषेकार्थमव्यग्रा भाण्डमुच्चावचं नृपा:॥ ४॥
बाह्लीको रथमाहार्षीज्जाम्बूनदविभूषितम्।
सुदक्षिणस्तु युयुजे श्वेतै: काम्बोजजैर्हयै:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भरत! राजाओं ने स्वयं ही युधिष्ठिर के राज्याभिषेक के लिए प्रयत्न किया और शांत मन से, बड़े आदर के साथ, छोटे-बड़े पात्र लाए। बाह्लीकन के राजा ने एक स्वर्ण-मंडित रथ मंगवाया। सुदक्षिण ने उस रथ में कम्बोज देश के श्वेत घोड़े जोते। 4-5।
 
Bharata! The kings themselves made efforts for the coronation of Yudhishthira and with calm minds, with great respect, brought small and big vessels. The King of Bahlikan brought a chariot which was decorated with gold. Sudakshin harnessed the white horses of Kamboja country to that chariot. 4-5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)