Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.61.20-22: मुझे तथा अन्य राजाओं को अचेत देखकर वे उस समय जोर-जोर से हंस रहे थे। भरत! तत्पश्चात् अर्जुन ने प्रसन्नतापूर्वक पाँच सौ बैल, जिनके सींग सोने से मढ़े हुए थे, प्रधान ब्राह्मणों में बाँट दिए। पिताश्री! न तो रन्तिदेव, न नाभाग, न मान्धाता, न मनु, न वेनन्दन राजा पृथु, न भगीरथ, न ययाति, न नहुष, आज के राजा युधिष्ठिर के समान धनवान राजा थे। | mahabharat अध्याय 2.61: दुर्योधनद्वारा युधिष्ठिरके अभिषेकका वर्णन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विसंज्ञान् भूमिपान् दृष्ट्वा मां च ते प्राहसंस्तदा।
तत: प्रहृष्टो बीभत्सु: प्रादाद्धेमविषाणिनाम्॥ २०॥
शतान्यनडुहां पञ्च द्विजमुख्येषु भारत।
न रन्तिदेवो नाभागो यौवनाश्वो मनुर्न च॥ २१॥
न च राजा पृथुर्वैन्यो न चाप्यासीद् भगीरथ:।
ययातिर्नहुषो वापि यथा राजा युधिष्ठिर:॥ २२॥
अनुवाद
मुझे तथा अन्य राजाओं को अचेत देखकर वे उस समय जोर-जोर से हंस रहे थे। भरत! तत्पश्चात् अर्जुन ने प्रसन्नतापूर्वक पाँच सौ बैल, जिनके सींग सोने से मढ़े हुए थे, प्रधान ब्राह्मणों में बाँट दिए। पिताश्री! न तो रन्तिदेव, न नाभाग, न मान्धाता, न मनु, न वेनन्दन राजा पृथु, न भगीरथ, न ययाति, न नहुष, आज के राजा युधिष्ठिर के समान धनवान राजा थे।
Seeing me and other kings unconscious, they were laughing loudly at that time. Bhaarat! Thereafter Arjuna happily distributed five hundred bulls, whose horns were covered with gold, among the main Brahmins. Father! Neither Rantidev, nor Nabhag, nor Mandhaata, nor Manu, nor Venanandan King Prithu, nor Bhagirath, nor Yayati, nor Nahush were such wealthy kings as King Yudhishthir is today.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥