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mahabharat 2.57.7: यह शकुनि कहता है कि तुम्हारा तेज क्षीण हो गया है। तुम श्वेत और दुबली हो गई हो; किन्तु बहुत सोचने पर भी मुझे तुम्हारे दुःख का कोई कारण नहीं दिखाई देता।   |   mahabharat अध्याय 2.57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.57.7 
अयं त्वां शकुनि: प्राह विवर्णं हरिणं कृशम्।
चिन्तयंश्च न पश्यामि शोकस्य तव सम्भवम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
यह शकुनि कहता है कि तुम्हारा तेज क्षीण हो गया है। तुम श्वेत और दुबली हो गई हो; किन्तु बहुत सोचने पर भी मुझे तुम्हारे दुःख का कोई कारण नहीं दिखाई देता।
 
This Shakuni says that your radiance has faded. You have become white and thin; but even after much thinking I do not see any reason for your grief.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)