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mahabharat 2.57.55: धृतराष्ट्र ने कहा - विदुर! यदि देवताओं की कृपा हो तो निश्चय ही मेरे पुत्रों और पाण्डु के पुत्रों में कोई संघर्ष नहीं होगा।   |   mahabharat अध्याय 2.57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  2.57.55 
धृतराष्ट्र उवाच
क्षत्त: पुत्रेषु पुत्रैर्मे कलहो न भविष्यति।
यदि देवा: प्रसादं न: करिष्यन्ति न संशय:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने कहा - विदुर! यदि देवताओं की कृपा हो तो निश्चय ही मेरे पुत्रों और पाण्डु के पुत्रों में कोई संघर्ष नहीं होगा।
 
Dhritarashtra said - Vidur! If the gods bless us, then there will certainly be no conflict between my sons and the sons of Pandu. 55.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)