Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.57.33: महाराज! यज्ञ देखने आये हुए अनेक राजाओं से भरे हुए यज्ञ मण्डप की बैठक व्यवस्था तारों से भरे हुए स्वच्छ आकाश के समान शोभायमान हो रही थी। | mahabharat अध्याय 2.57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पार्थिवैर्बहुभि: कीर्णमुपस्थानं दिदृक्षुभि:।
अशोभत महाराज नक्षत्रैर्द्यौरिवामला॥ ३३॥
अनुवाद
महाराज! यज्ञ देखने आये हुए अनेक राजाओं से भरे हुए यज्ञ मण्डप की बैठक व्यवस्था तारों से भरे हुए स्वच्छ आकाश के समान शोभायमान हो रही थी।
Maharaj! The seating arrangement of the Yajna Mandap filled with many kings who had come to see the Yajna looked beautiful like the clear sky filled with stars. 33.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥