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mahabharat 2.57.25: वे सभी लोग सुन्दर स्वर्ण पात्र और बहुत सारा धन लेकर आये थे, फिर भी उनमें से कोई भी राजद्वार में प्रवेश नहीं कर पाया, अर्थात् उनमें से केवल कुछ ही लोग प्रवेश कर पाए।   |   mahabharat अध्याय 2.57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.57.25 
कमण्डलूनुपादाय जातरूपमयाञ्छुभान्।
एतद् धनं समादाय प्रवेशं लेभिरे न च॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वे सभी लोग सुन्दर स्वर्ण पात्र और बहुत सारा धन लेकर आये थे, फिर भी उनमें से कोई भी राजद्वार में प्रवेश नहीं कर पाया, अर्थात् उनमें से केवल कुछ ही लोग प्रवेश कर पाए।
 
All those people had come with beautiful golden pots and so much wealth, yet none of them were able to enter the royal gates, that is, only a few of them were able to enter.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)