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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 57: धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.57.18 
दशान्यानि सहस्राणि नित्यं तत्रान्नमुत्तमम्।
भुञ्जते रुक्मपात्रीभिर्युधिष्ठिरनिवेशने॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इसके अलावा युधिष्ठिर के महल में प्रतिदिन दस हजार अन्य ब्राह्मण सोने की थालियों में भोजन करते हैं।
 
Besides this, ten thousand other brahmins eat food on golden plates every day in Yudhishthira's palace.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)