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mahabharat 2.56.21: हे पुरुषश्रेष्ठ! मैं पासे फेंकने में कुशल हूँ; अतः मैं तुम्हारे लिए युधिष्ठिर का राज्य और तेजस्वी राजसी धन अवश्य प्राप्त करूँगा, इसमें कोई संदेह नहीं है॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 2.56: पाण्डवोंपर विजय प्राप्त करनेके लिये शकुनि और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 56: पाण्डवोंपर विजय प्राप्त करनेके लिये शकुनि और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.56.21 
तस्याक्षकुशलो राजन्नादास्येऽहमसंशयम्।
राज्यं श्रियं च तां दीप्तां त्वदर्थं पुरुषर्षभ॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! मैं पासे फेंकने में कुशल हूँ; अतः मैं तुम्हारे लिए युधिष्ठिर का राज्य और तेजस्वी राजसी धन अवश्य प्राप्त करूँगा, इसमें कोई संदेह नहीं है॥ 21॥
 
O best of men! I am skilled in throwing dice; therefore, I will certainly obtain Yudhishthira's kingdom and the resplendent royal wealth for you, there is no doubt about it. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)