Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.55.40: चाचाजी! अब मुझे (मरने की) अनुमति दीजिए, क्योंकि मैं अत्यन्त दुःखी हूँ और ईर्ष्या की अग्नि में जल रहा हूँ। कृपया राजा धृतराष्ट्र को मेरा हाल बताइए।॥40॥ | mahabharat अध्याय 2.55: दुर्योधनका मयनिर्मित सभाभवनको देखना और पग-पगपर भ्रमके कारण उपहासका पात्र बनना तथा युधिष्ठिरके वैभवको देखकर उसका चिन्तित होना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स मामभ्यनुजानीहि मातुलाद्य सुदु:खितम्।
अमर्षं च समाविष्टं धृतराष्ट्रे निवेदय॥ ४०॥
अनुवाद
चाचाजी! अब मुझे (मरने की) अनुमति दीजिए, क्योंकि मैं अत्यन्त दुःखी हूँ और ईर्ष्या की अग्नि में जल रहा हूँ। कृपया राजा धृतराष्ट्र को मेरा हाल बताइए।॥40॥
Uncle! Now give me permission (to die), because I am very sad and burning in the fire of jealousy. Please inform King Dhritarashtra about my condition. ॥ 40॥
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि द्यूतपर्वणि दुर्योधनसंतापे सप्तचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत द्यूतपर्वमें दुर्योधनसंतापविषयक सैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥