Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.55.38: इसीलिए मैं भाग्य को श्रेष्ठ और प्रयत्न को व्यर्थ मानता हूँ; क्योंकि हम धृतराष्ट्र के पुत्र हानि उठा रहे हैं और ये कुन्ती के पुत्र दिन-प्रतिदिन उन्नति कर रहे हैं ॥ 38॥ | mahabharat अध्याय 2.55: दुर्योधनका मयनिर्मित सभाभवनको देखना और पग-पगपर भ्रमके कारण उपहासका पात्र बनना तथा युधिष्ठिरके वैभवको देखकर उसका चिन्तित होना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसीलिए मैं भाग्य को श्रेष्ठ और प्रयत्न को व्यर्थ मानता हूँ; क्योंकि हम धृतराष्ट्र के पुत्र हानि उठा रहे हैं और ये कुन्ती के पुत्र दिन-प्रतिदिन उन्नति कर रहे हैं ॥ 38॥
That is why I consider destiny to be superior and efforts to be futile; because we, the sons of Dhritarashtra, are suffering losses while these sons of Kunti are progressing day by day. ॥ 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥